29 March 2017

chemistry notes download for IAS/PCS/PGT

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CHEMICAL KINETICS
ATOMIC STRUCTURE
PHOTOCHEMISTRY
SURFACE CHEMISTRY


25 March 2017

क्या करें सर ....पढ़ने का मूड नही हैं.....

आप एक घने जंगल से होकर गुजर रहे है,अचानक शेर की दहाड़ सुनाई देती है .....आप यह कहने का साहस जुटा सकते हो कि आज मूड नहीं है इसलिए नहीं दौडूगा.....आपको तैरना नहीं आता और आप पानी में डूब रहे हैं,तो आप यह कहने का साहस कर सकते है कि" बचाओ बचाओ " चिल्लाने का मूड नहीं है.........क्या आप civil line या नये यमुना पुल पर घूमने के लिए मूड की इजाज़त लेते हो ??

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क्या आप शुक्रवार को हिट मूवी का first show देखने के लिए मूड का सहारा लेते हो??.......क्या आप अपनी गर्ल फ्रेंड से बात करने के लिए मूड का सहारा लेते हो......नहीं ना....तो फिर पढ़ाई में हर बार मूड की हेल्प क्यों....??आप कोशिश कर देख लीजिए जब भी आप अपने मूड से पूछेंगे,तो कम से कम आधे दिन आपका मन कहेंगा ....पढ़ने का मन नहीं है,जो असफलता की नींव तैयार करने में मदद करेगा,इसलिए कभी जरूरी काम के लिए मूड की तबीयत ना पूछें.

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मैंने कई छात्रों से सुना है,मैं डाक्टर बनना तो चाहता हूँ,पर पढ़ने में मन नहीं लगता क्या करूँ....अगर आपने डाक्टर बनने का संकल्प किया है तो इसका मतलब तो यह हुआ ना आपने सबसे कठिन कामों को ,सर्जरियो को,करने का फैसला किया है..........दोस्तों जैसे मन्दिर में पूजा -पाठ करने के लिए पुजारी कभी मूड का सहारा नहीं लेता,शीत ऋतु में बर्फ जैसे ठंडे पानी में सूर्योदय से पहले नहाकर बैठ जाता है,वह यह काम साल के 365 दिन बिना मूड का सहारा लिए हर रोज़ करता है,उसी तरह आपको बिना बहाना बनाएँ अपने काम को लगन से हर रोज़ करना ही करना है .

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इसलिए मित्रों जो काम जरूरी है,उसके लिए मूड का सवाल भी पैदा नहीं होता.....मूड के आज से ही दास नहीं मालिक बन जाईये......फिर देखिए आपकी AIIMS/KGMC/BHU/AFMC/IITs/NITs की राह कितनी सुगम तथा आसान हो जाती हैं ...

31 December 2016

How to remember biology-001

आदरणीय मित्रो ,
प्रस्तुत हैं,बायोलोजी -



23 December 2016

"नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की एक कविता"

 You start dying slowly
if you do not travel,
if you do not read,
If you do not listen to the sounds of life,
If you do not appreciate yourself.
You start dying slowly
When you kill your self-esteem;
When you do not let others help you.
You start dying slowly
If you become a slave of your habits,
Walking everyday on the same paths…
If you do not change your routine,
If you do not wear different colours
Or you do not speak to those you don’t know.
You start dying slowly
If you avoid to feel passion
And their turbulent emotions;
Those which make your eyes glisten
And your heart beat fast.
You start dying slowly
If you do not change your life when you are not satisfied with your job, or with your love,
If you do not risk what is safe for the uncertain,
If you do not go after a dream,
If you do not allow yourself,
At least once in your lifetime,
To run away from sensible advice…
9 thoughts on “Poetry 108: You start dying slowly – By Pablo Neruda”




जो बन जाते हैं आदत के गुलाम,
चलते रहे हैं हर रोज़ उन्हीं राहों पर,
बदलती नहीं जिनकी कभी रफ्तार,
जो अपने कपड़ों के रंग बदलने का जोखिम नहीं उठाते,
और बात नहीं करते अनजान लोगों से,
वे मरते हैं धीमी मौत।
जो रहते हैं दूर आवेगों से,
भाती है जिन्हें सियाही उजाले से ज़्यादा,
जिनका मैंबेदखल कर देता है उन भावनाओं को,
जो चमक भरती हैं तुम्हारी आँखों में,
उबासियों को मुस्कान में बदल देती हैं,
ग़लतियों और दुःखों से उबारती हैं हृदय को,
वे मरते हैं धीमी मौत।

जो उलट-पुलट नहीं देते सबकुछ
जब काम हो जाये बोझिल और उबाऊ,
किसी सपने के पीछे भागने की ख़ातिर
चल नहीं पड़ते अनजान राहों पर,
जो जिन्दगी में कभी एक बार भी,
समझदारी भरी सलाह से बचकर भागते नहीं,
वे मरते हैं धीमी मौत।

जो निकलते नहीं यात्राओं पर,
जो पढ़ते नहीं,
नहीं सुनते संगीत,
ढूँढ़ नहीं पाते अपने भीतर की लय,
वे मरते हैं धीमी मौत।

जो ख़त्म कर डालते हैं ख़ुद अपने प्रेम को,
थामते नहीं मदद के लिए बढ़े हाथ,
जिनके दिन बीतते हैं
अपनी बदकिस्मती या
कभी न रुकने वाली बारिश की शिकायतों में,
वे मरते हैं धीमी मौत।

जो कोई परियोजना शुरू करने से पहले ही छोड़ जाते हैं,
अपरिचित विषयों के बारे में पूछते नहीं सवाल,
और चुप रहते हैं उन चीज़ों के बारे में पूछने पर
जिन्हें वे जानते हैं,
वे मरते हैं धीमी मौत।

किश्तों में मरते चले जाने से बचना है
तो याद रखना होगा हमेशा
कि जिन्दा रहने के लिए काफ़ी नहीं बस साँस लेते रहना,
कि एक प्रज्ज्वल धैर्य ही ले जायेगा हमें
एक जाज्वल्यमान सुख की ओर।

24 September 2016

गालियाँ और समाज



तीन महिलाओं की कहानी पर आधारित फिल्म “पार्च्ड” देखा |जिसमे एक महिला कहती हैं की सारी गालियाँ स्त्रियों को लेकर बनी हैं ,पुरुषो को लेकर क्यूँ नही . सुरवीन चावला बेधडक गालियाँ बकती हैं,सवाल इस बात का हैं की गालियाँ इतनी कामन क्यूँ हैं की लोगो के मुह से थोड़ी सिचुएशन बदलते ही झड़ने लगती हैं.इन गालियों से लोग क्या साबित करना चाहते हैं ?.खुद पर नियन्त्रण न रख पाने वाला पुरुष कायर जीव हैं ?जो किसी अंग विशेष को लेकर ,किसी विशेष सेक्सुअल सिचुएशन या किसी स्त्री को लेकर अभद्र टिप्पणी करता हैं खासकर उस स्त्री को लेकर जिसका उस घटना, उस स्थिति से कोई सम्बन्ध न हो,उसको गालिया बक-कर अपनी विजय समझता हैं | गाली बकने वाले अपनी माँ बहनों बेटियों की इज्जत नही करते ,ये खुद पर अनुशासन नही रख सकते ,इनमें इतना दम  नही होता की किसी सिचुएशन के अनुसार खुद को ढाल सके,यकीं मानिए ,ये बेहद  कमजोर और कायर लोग होते हैं |
      गली-मुहल्लों में गालियाँ एड्रेस करने का तरीका हो गयी हैं ,कोई बात गालियों से शुरू ,गालियों से खत्म |परिवार में आपसी वार्तालाप में ,दोस्तों में आपसी संवाद में ..|मूल्य बदल रहे हैं युवा हाईपरटेंशन में जी रहे हैं ,थोड़ी थोड़ी बात बर्दाश्त से बाहर हो जाती हैं ,जी भर के गालियाँ बकते हैं सकूँन पाने के लिए ...थोडा प्रेशर बढ़ा तो ड्रग,नही तो सुसाईड |क्लास में बैठकर टीचर्स को गालियाँ |3-इडियट जैसी घटिया फिल्म मैंने नही देखी  जहाँ शिक्षको का इतना गंदा मजाक उड़ाया गया हों ,खासकर चतुर के भाषण द्वारा |समाज की मानसिकता बदल रही हैं ,नैतिक मूल्यों को लेकर |

5 September 2016

शिक्षक दिवस

आज शिक्षक दिवस हैं |शिक्षक दिवस पर मैं अपने समस्त शिक्षको और छात्रो को बधाई देता हूँ , छात्र भी बहुत कुछ सिखाते हैं |
सुबह सुबह मेरे प्रिय छात्र ई.धीरेन्द्र का मैसेज पढ़ा ,दिल से निकले चंद शब्द ,भावनाए बड़ा सुखद एहसास कराती हैं |आज जब कोई छात्र IIT या MBBS इंट्रेंस क्लियर करता हैं तो लगता हैं की यह खुद अपनी सफलता हैं ,एक्चुअल में यह खुद मेरी सफलता होती हैं ..क्यूंकि देश के बड़े बड़े कालेजों में पढ़ना मेरा सपना था किन्तु मैं खुद एक समय में एक डिग्री के लिए एक ही जगह पढ़ सकता था .जब मेरे छात्र इन बड़े कालेजो (IITs या मेडिकल)में जाते हैं,तो ऐसा लगता हैं की मैं वहाँ भी पहुच गया ,हर छात्र को सफलता दिलाना मेरा पर्सनल मिशन होता हैं “

आज इस मौके पर मैं हर छात्र से कहना चाहता हूँ की तुम्हारा “I Can”तुम्हारे “IQ” से ज्यादा महत्वपूर्ण होता हैं |तुम अपनी परिस्थितिओं से ऊपर हों,ड्रीमर बनों,...जहाँ तक सोच सकते हों हासिल भी कर सकते हों ,पर ध्यान रखना मानव का मन एक समय में केवल एक ही चीज पर फोकस कर सकता हैं,तुम्हे भी एक ही चीज पर फोकस करना होंगा तभी आशातीत सफलता प्राप्त कर सकोंगे |हर दिन 60000 विचार आते हैं,फ़ालतू ,गैर जरुरी विचारों पर ध्यान न दो ,भले ही वे अछे विचार क्यूँ न हो ,ध्यान दो केवल उसी विचार पर जो तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य की तरफ ले जाए ,अपने मन को इस तरह ट्रेनिंग दो, की वह सिर्फ इन्ही विचारो को जगह दे ,विचार उर्जा हैं ,फोटान जैसे हैं ...उर्जा के करेस्पोनडेन्स जो फ्रिक्वेंसी हैं ,ब्रम्हांड की उस फ्रिक्वेंसी की अन्य चीजे भी आकर्षित होती हैं | विचार ही हमसे कार्य करवाते हैं इसलिए विचारो की गुणवत्ता से समझौता न करना |
लक्ष्यों के पीछे भागते भागते यंत्रवत ही मत हो जाना ,कड़ी मेहनत से मन और शरीर सुधारो,आत्मा को बलवान बनाओ ,जिन कामो को करने से डरते हों उन्हें करों ,असीम उर्जा और अनंत उत्साह के साथ जीना प्रारम्भ करो ,सूर्य को उगते देखो,बरसात में नृत्य करों,ऐसा व्यक्ति बनो जैसा बनने का तुम स्वप्न देखते हों |
तुम कोई शंका मत रखना ,कोई डर मत पालना ,डर मन की निर्मित चेतना की नकारात्मक धारा के शिवा कुछ नही हैं ,कोई चीज तुम बनाते हो ,तो उसे नष्ट भी कर सकते हों,हर निर्मित वस्तु की तरह डर को भी मन में पोषित करते हो, तुम इसको नष्ट कर दो, इससे उपर उठो ...और अपने कठोर परिश्रम और स्मार्ट वर्किंग पर भरोसा रखते हुए सफलता की ओर अग्रसर रहो ,हार्दिक शुभकामनाये|

22 May 2016

तारे जमीन पर |

9 साल का छोटू ढाबे पर काम करता हैं ,जूठे बर्तन साफ़ करना,चाय पहुँचाना ,चाय का ग्लास उठाना ,उसका रोजमर्रा का काम हैं ,कुछ मिनट पहले छोटू मेरी भी चाय लेकर खड़ा था मैं सोचने को मजबूर हो गया |विश्व में छोटू जैसे 40 करोड़ बाल श्रमिक अपना बचपन बेचने के लिए मजबूर हैं किन्तु वर्ष 2014 में घोषित शांति के नोबल पुरस्कार ने एक बार पुनः  समाज और सरकार का ध्यान खीचा हैं तथा बालमन में सुनहरे भविष्य की आशाये भर दी हैं |
         आकड़ो पर ध्यान दें, तो विश्व में 40 करोड़ बाल श्रमिक हैं ,उनमे से सर्वाधिक बाल श्रमिक भारत में हैं ,हर चौथा बाल श्रमिक भारतीय हैं |आंध्रप्रदेश में सबसे अधिक बाल श्रमिक हैं दूसरे नम्बर पर संयुक्त रूप से यू पी और दिल्ली हैं ,कम से कम 50 लाख बाल श्रमिक ईट भट्ठे पर ,लगभग 10 करोड़ बाल श्रमिक 6-14 वर्ष के हैं जो असंगठित क्षेत्रो में कार्य कर रहे हैं लगभग 20 % घरेलू नौकर हैं |
                  छोटू के सात भाई बहन हैं ,2 बड़े हैं जिनकी उम्र क्रमशः 13 व् 10 साल हैं ,दोनों ईट भट्ठे पर काम करते हैं ,पिता को शराब की लत हैं वो भी उसी ईट भट्ठे पर काम करता हैं, माँ दूसरो के घरो में बर्तन मांजती हैं ,छोटू को इस ढाबे पर 50 रूपये व् दो जून का खाना मिलता हैं ,ढाबे पर छोटू के श्रम की बस इत्ती सी कीमत हैं |
              भू-स्वामी,उद्योगपति बच्चो को कम पैसे देकर काम करा लेते हैं |परिवार का बड़ा आकार होने के कारण माँ बाप इन्हें भरपेट भोजन नही दे पाते हैं ,ऐसे में इन्हें बीडी के कारखाने,ईट भट्ठे ,कांच की फैक्ट्रियो या फिर बाईक रिपेयरिंग की दूकान पर रखवा देते हैं ,जहाँ इन बच्चो का जीवन पूरी तरह अंधकारमय हो जाता हैं |
            किसी बुजुर्ग और बच्चे के साथ होने वाला दुर्व्यवहार मुझे अंदर तक हिला देता हैं ,छोटू जैसे बच्चो की पढ़ाई के लिए मैं वर्षो से काम कर रहा हूँ ,और उपेक्षित बुजुर्गो के लिए योजनाओं पर क्रियान्वयन चल रहा हैं क्या आप मेरे साथ हैं ?यदि हैं तो बाल श्रमिको से अच्छे से पेश आये और हाँ उनकी एजुकेशन और अन्य जरुरी मदद कर सके तो जरुर करे,ईश्वर देख रहा हैं | प्लीज |