24 September 2016

गालियाँ और समाज



तीन महिलाओं की कहानी पर आधारित फिल्म “पार्च्ड” देखा |जिसमे एक महिला कहती हैं की सारी गालियाँ स्त्रियों को लेकर बनी हैं ,पुरुषो को लेकर क्यूँ नही . सुरवीन चावला बेधडक गालियाँ बकती हैं,सवाल इस बात का हैं की गालियाँ इतनी कामन क्यूँ हैं की लोगो के मुह से थोड़ी सिचुएशन बदलते ही झड़ने लगती हैं.इन गालियों से लोग क्या साबित करना चाहते हैं ?.खुद पर नियन्त्रण न रख पाने वाला पुरुष कायर जीव हैं ?जो किसी अंग विशेष को लेकर ,किसी विशेष सेक्सुअल सिचुएशन या किसी स्त्री को लेकर अभद्र टिप्पणी करता हैं खासकर उस स्त्री को लेकर जिसका उस घटना, उस स्थिति से कोई सम्बन्ध न हो,उसको गालिया बक-कर अपनी विजय समझता हैं | गाली बकने वाले अपनी माँ बहनों बेटियों की इज्जत नही करते ,ये खुद पर अनुशासन नही रख सकते ,इनमें इतना दम  नही होता की किसी सिचुएशन के अनुसार खुद को ढाल सके,यकीं मानिए ,ये बेहद  कमजोर और कायर लोग होते हैं |
      गली-मुहल्लों में गालियाँ एड्रेस करने का तरीका हो गयी हैं ,कोई बात गालियों से शुरू ,गालियों से खत्म |परिवार में आपसी वार्तालाप में ,दोस्तों में आपसी संवाद में ..|मूल्य बदल रहे हैं युवा हाईपरटेंशन में जी रहे हैं ,थोड़ी थोड़ी बात बर्दाश्त से बाहर हो जाती हैं ,जी भर के गालियाँ बकते हैं सकूँन पाने के लिए ...थोडा प्रेशर बढ़ा तो ड्रग,नही तो सुसाईड |क्लास में बैठकर टीचर्स को गालियाँ |3-इडियट जैसी घटिया फिल्म मैंने नही देखी  जहाँ शिक्षको का इतना गंदा मजाक उड़ाया गया हों ,खासकर चतुर के भाषण द्वारा |समाज की मानसिकता बदल रही हैं ,नैतिक मूल्यों को लेकर |

5 September 2016

शिक्षक दिवस

आज शिक्षक दिवस हैं |शिक्षक दिवस पर मैं अपने समस्त शिक्षको और छात्रो को बधाई देता हूँ , छात्र भी बहुत कुछ सिखाते हैं |
सुबह सुबह मेरे प्रिय छात्र ई.धीरेन्द्र का मैसेज पढ़ा ,दिल से निकले चंद शब्द ,भावनाए बड़ा सुखद एहसास कराती हैं |आज जब कोई छात्र IIT या MBBS इंट्रेंस क्लियर करता हैं तो लगता हैं की यह खुद अपनी सफलता हैं ,एक्चुअल में यह खुद मेरी सफलता होती हैं ..क्यूंकि देश के बड़े बड़े कालेजों में पढ़ना मेरा सपना था किन्तु मैं खुद एक समय में एक डिग्री के लिए एक ही जगह पढ़ सकता था .जब मेरे छात्र इन बड़े कालेजो (IITs या मेडिकल)में जाते हैं,तो ऐसा लगता हैं की मैं वहाँ भी पहुच गया ,हर छात्र को सफलता दिलाना मेरा पर्सनल मिशन होता हैं “

आज इस मौके पर मैं हर छात्र से कहना चाहता हूँ की तुम्हारा “I Can”तुम्हारे “IQ” से ज्यादा महत्वपूर्ण होता हैं |तुम अपनी परिस्थितिओं से ऊपर हों,ड्रीमर बनों,...जहाँ तक सोच सकते हों हासिल भी कर सकते हों ,पर ध्यान रखना मानव का मन एक समय में केवल एक ही चीज पर फोकस कर सकता हैं,तुम्हे भी एक ही चीज पर फोकस करना होंगा तभी आशातीत सफलता प्राप्त कर सकोंगे |हर दिन 60000 विचार आते हैं,फ़ालतू ,गैर जरुरी विचारों पर ध्यान न दो ,भले ही वे अछे विचार क्यूँ न हो ,ध्यान दो केवल उसी विचार पर जो तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य की तरफ ले जाए ,अपने मन को इस तरह ट्रेनिंग दो, की वह सिर्फ इन्ही विचारो को जगह दे ,विचार उर्जा हैं ,फोटान जैसे हैं ...उर्जा के करेस्पोनडेन्स जो फ्रिक्वेंसी हैं ,ब्रम्हांड की उस फ्रिक्वेंसी की अन्य चीजे भी आकर्षित होती हैं | विचार ही हमसे कार्य करवाते हैं इसलिए विचारो की गुणवत्ता से समझौता न करना |
लक्ष्यों के पीछे भागते भागते यंत्रवत ही मत हो जाना ,कड़ी मेहनत से मन और शरीर सुधारो,आत्मा को बलवान बनाओ ,जिन कामो को करने से डरते हों उन्हें करों ,असीम उर्जा और अनंत उत्साह के साथ जीना प्रारम्भ करो ,सूर्य को उगते देखो,बरसात में नृत्य करों,ऐसा व्यक्ति बनो जैसा बनने का तुम स्वप्न देखते हों |
तुम कोई शंका मत रखना ,कोई डर मत पालना ,डर मन की निर्मित चेतना की नकारात्मक धारा के शिवा कुछ नही हैं ,कोई चीज तुम बनाते हो ,तो उसे नष्ट भी कर सकते हों,हर निर्मित वस्तु की तरह डर को भी मन में पोषित करते हो, तुम इसको नष्ट कर दो, इससे उपर उठो ...और अपने कठोर परिश्रम और स्मार्ट वर्किंग पर भरोसा रखते हुए सफलता की ओर अग्रसर रहो ,हार्दिक शुभकामनाये|

22 May 2016

तारे जमीन पर |

9 साल का छोटू ढाबे पर काम करता हैं ,जूठे बर्तन साफ़ करना,चाय पहुँचाना ,चाय का ग्लास उठाना ,उसका रोजमर्रा का काम हैं ,कुछ मिनट पहले छोटू मेरी भी चाय लेकर खड़ा था मैं सोचने को मजबूर हो गया |विश्व में छोटू जैसे 40 करोड़ बाल श्रमिक अपना बचपन बेचने के लिए मजबूर हैं किन्तु वर्ष 2014 में घोषित शांति के नोबल पुरस्कार ने एक बार पुनः  समाज और सरकार का ध्यान खीचा हैं तथा बालमन में सुनहरे भविष्य की आशाये भर दी हैं |
         आकड़ो पर ध्यान दें, तो विश्व में 40 करोड़ बाल श्रमिक हैं ,उनमे से सर्वाधिक बाल श्रमिक भारत में हैं ,हर चौथा बाल श्रमिक भारतीय हैं |आंध्रप्रदेश में सबसे अधिक बाल श्रमिक हैं दूसरे नम्बर पर संयुक्त रूप से यू पी और दिल्ली हैं ,कम से कम 50 लाख बाल श्रमिक ईट भट्ठे पर ,लगभग 10 करोड़ बाल श्रमिक 6-14 वर्ष के हैं जो असंगठित क्षेत्रो में कार्य कर रहे हैं लगभग 20 % घरेलू नौकर हैं |
                  छोटू के सात भाई बहन हैं ,2 बड़े हैं जिनकी उम्र क्रमशः 13 व् 10 साल हैं ,दोनों ईट भट्ठे पर काम करते हैं ,पिता को शराब की लत हैं वो भी उसी ईट भट्ठे पर काम करता हैं, माँ दूसरो के घरो में बर्तन मांजती हैं ,छोटू को इस ढाबे पर 50 रूपये व् दो जून का खाना मिलता हैं ,ढाबे पर छोटू के श्रम की बस इत्ती सी कीमत हैं |
              भू-स्वामी,उद्योगपति बच्चो को कम पैसे देकर काम करा लेते हैं |परिवार का बड़ा आकार होने के कारण माँ बाप इन्हें भरपेट भोजन नही दे पाते हैं ,ऐसे में इन्हें बीडी के कारखाने,ईट भट्ठे ,कांच की फैक्ट्रियो या फिर बाईक रिपेयरिंग की दूकान पर रखवा देते हैं ,जहाँ इन बच्चो का जीवन पूरी तरह अंधकारमय हो जाता हैं |
            किसी बुजुर्ग और बच्चे के साथ होने वाला दुर्व्यवहार मुझे अंदर तक हिला देता हैं ,छोटू जैसे बच्चो की पढ़ाई के लिए मैं वर्षो से काम कर रहा हूँ ,और उपेक्षित बुजुर्गो के लिए योजनाओं पर क्रियान्वयन चल रहा हैं क्या आप मेरे साथ हैं ?यदि हैं तो बाल श्रमिको से अच्छे से पेश आये और हाँ उनकी एजुकेशन और अन्य जरुरी मदद कर सके तो जरुर करे,ईश्वर देख रहा हैं | प्लीज |

21 May 2016

किसानो की आत्महत्या,कृषि की आत्महत्या हैं |

आग लगने से  रामू की झोपडपट्टी और कच्चा घर जल कर खाक हो गये,साथ ही घर में रखा अनाज और बेटी की शादी के लिए जुटाया गया सामान भी जल गया |
        रामू किसान हैं ,वही किसान.......जो देश की 67 % जनता को भोजन की गारंटी देता हैं|वही किसान जो हर ओर से बदहाली की मार झेल रहा हैं ,आर्थिक असुरक्षा ,ऋण ,दिवालियापन,फसल की असफलता और ,बीमारी झेल रहा हैं ,मुंशी प्रेमचन्द्र की कहानी “पूस की रात”के हलकू के जैसा किसान हैं रामू, ..रामू को पता नही की सरकार की कुछ योजनाये भी होती हैं उसने गाँव में कोई अफसर तक नही देखा कोई विकास अधिकारी या कृषि अधिकारी या इससे जुड़े किसी जिम्मेदार व्यक्ति को नही देखा |हाँ रामू ने कुछ लोगो को देखा हैं ...फसल बर्बाद होने की वजह  से ट्रैक्टर का  बैंक ऋण न चुका पाते अपने भाईयो की जमींन और आबरू को नीलाम करने वाले बैंक अफसरों को ,साहुकारो को और शोषको को|रामू अत्यंत निराश हैं उसको जीने की इच्छाशक्ति खत्म हो चली हैं|
        स्वतन्त्रता प्राप्ति के समय कृषि का जीडीपी में 55 % योगदान था जो की 2014 तक मात्र 14% रह गया हैं | NCRB के अनुसार 1991-2004 तक 3 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं भारत में हर घंटे 2 किसान मर रहे हैं सबसे ख़राब हालत आंध्र प्रदेश,विदर्भ(महाराष्ट्र),बुन्देलखण्ड और तमिलनाडु में हैं |किसानो की इतनी दयनीय स्थिति होने के वावजूद प्रदेश की सत्ताधारी पार्टियो और केन्द्रीय सरकार की कोई ठोस पहल समझ में नही आती |
           कृषि की बदहाली के लिए प्राकृतिक कारण ,मानवीय कारण ,पर्यावरण प्रदूषण (के कारण बदलते मानसून) ,पूर्वी तट के भयंकर तूफ़ान ,चक्रवात जिम्मेदार तो हैं ही ,किन्तु तकनीक की कमी ,इन्फ्रास्ट्रक्चर का आभाव ,कृषि शोध का विकास एवं क्रियान्वयन की कमी  भी बदहाली के कारण हैं,राजनैतिक पार्टिया किसानो के हित में नीतियाँ बनाने में असफल रही हैं ,यदि भारत का अन्नदाता अपने पैरो को खेतो से हटा लेंगा तो उदद्योग और सेवाक्षेत्र का विकास अवरुद्ध हो जायेंगा |कहा भी गया हैं “भूखे भजन न होय गोपाला” अतः यदि पेट में भोजन होगा तभी मोबाईल और कम्प्यूटर की उपयोगिता भी होंगी |

19 May 2016

सबकी सुनिए ,मन की करिए |

                   मेरा दोस्त मानसिक रोगी हो चला था ,एक बेहतरीन इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक किया था ,नेशनल लेवल के उस कालेज का तीसरा टोपर था ,कम्पनियां आई लोग नौकरिया पाते गये ...वो नहीं पाया |इसी से डिप्रेस था....| नींद लाने वाली दवा खाए बिना उसे नींद तक नही आती थी |उसे घर वालो ने कुछ दिन घूमने के लिए बाहर भेज दिया ,वह लौटा,
नयी उर्जा से ,नयी शक्ति खुद को बदला और विगत वर्ष PCS का टापर बना |
                       PCS में जाना उसका ड्रीम था,हमेशा अफसर बनने की बाते करता था ,इसीलिए वह अपने इंजीनियरिंग कैरियर के साथ न्याय नही कर पा रहा था |अगर उसको नौकरी मिल गयी होती तो,जिंदगी भर वह ऐसा काम कैसे करता ?जो उसको उतना पसंद नही था ...कुछ दिन पहले कोटा से खबर आई IIT में 140 नम्बर पाने वाली एक लड़की ने सुसाईड कर ली थी ,क्यूंकि वह इंजीनियरिंग नही पढना चाहती थी किन्तु उसने अपने माँ के दबाव के कारण चुना था ,सुसाईड नोट में उसने लिखा की अपनी माँ से नफरत करती हैं साथ ही माँ को हिदायत भी दी हैं की उसकी छोटी बहन पर यह सब न थोपे ....कोटा में ऐसे सैकड़ो केस होते रहते हैं ,अभिभावक अपने सपनो को न जाने कब बच्चो पर लाद देते हैं ....वो नही कर पाए तो उनके बच्चे ये बनेंगे ,वे बनेंगे ....ध्यान रखिये बच्चे आपके माध्यम से आये जरूर हैं ,पर उनकी रूचि अलग हो सकती हैं ,उनको करने दीजिये जो करना चाहे कैरियर से जुड़ा ....आप बस सही गलत और उससे जुड़े लोगो की नीयत देखिये |वे यूनिक हैं ,उनके फिंगरप्रिंट आपसे नही मिलते ,उनकी परवरिश आपसे अलग हैं ,उनकी कैरियर सम्बन्धी चुनौतिया आपसे अलग हैं ,फिर आप उनसे ,उन सपनो को पूरा करने की आस क्यूँ लगा बैठे हैं जो आप कभी नही कर सके |
                  जो होता हैं अच्छे के लिए होता हैं , जो नही होता वो और अच्छे के लिए होता हैं |अगर मेरे दोस्त को नौकरी मिल जाती तो वह रोज टिफिन उठाता ,आफिस जाता ...फिर बॉस की डांट खाता घर आता...वही सबकुछ ,,,पर वो देश के विकास में जो सक्रीय भूमिका निभाना चाहता था उससे वंचित रह जाता ...साथ ही अपना सपना भी पूरा नही कर पता ....PCS की परिस्थितिया ,प्लेसमेंट से पायी नौकरी की तुलना में तो काफी बेहतर तो हैं ही ,साथ ही उसका बड़ा अफसर बनने का सपना भी पूरा हुआ |

17 May 2016

प्राइवेट स्कूल किस दिशा में बच्चो को धकेल रहे हैं?

2003 के वे दिन याद आते हैं जब मेरा इंटर का इग्जाम था ,सेंटर राधा रमन गर्ल्स इंटर कालेज नैनी था ,नकल लगभग न के बराबर थी ...मैंम सिर हिलाने नही देती थी ,और हम लोग नकल का सोचते ही नही थे ...,न तो हमारे स्कूल नक़ल में विश्वास करते थे ..इमानदारी और नैतिकता के साथ ..बैच(बोर्ड वालो) का भी लिहाज था ...अब परिदृश्य बदल चुका हैं|

मेरे स्टूडेंट्स ने cpmt निकाला,IIT निकाला,उनकी बात अलग सी थी ,कई मेरे ही मेडिकल कालेज में जूनियर और सीनियर भी हैं |पर इनमे कुछ करने की ,कुछ अलग ही बर्निंग डिजायर थी |एक सेकंड डिविजनर दोस्त ने आईएएस की परीक्षा पास की तो परसेंटेज बनाम वास्तविक योग्यता पर बहस छिड़ना लाजमी था |

मेरे स्टूडेंट कुलदीप 96.4 प्रतिशत के साथ तथा सर्वेश ने 96 प्रतिशत के साथ इसी साल इंटर उत्तीर्ण किया ,इन लोगो ने पढाई में मेहनत भी की थी ...पर कहावत हैं न ..”बहती गंगा में हाथ धोने वाली” ..यकीन हैं की मौका पाते ही ......हाथ अजमाया ही होंगा ...|पर परिवेश के अनुसार एडोप्ट करना पड़ता हैं ,बधाई हो बच्चो |जहा टीचर नकल न करने वालो को क्लास से बाहर बैठा देते हो..भीड़ चाल में रहना तुम्हारी मजबूरी भी हो सकती थी |
                                  एक ही स्कूल के टापर ...वो भी ...उस बदनाम स्कूल के जो नकल के लिए ब्लैक लिस्टेड रहा था कभी |....फिर यू पी बोर्ड की सफाई...”रिजल्ट पारदर्शी तरीके से घोषित किये गये हैं”|इलाहाबाद जनसंख्या की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा जिला हैं जहाँ पर सबसे अधिक इंटर कालेज भी हैं ...हिंदी मीडियम यू पी बोर्ड का कालेज जहाँ बच्चे सुविधा के अनुसार एडमिशन लेते हैं की प्रबन्धक इग्जाम के समय व्यवस्था कर पाते हैं की नही ,व्यवस्था से मेरा तात्पर्य नक़ल की व्यवस्था ,सेंटर को मन वांक्षित जगह लेने की व्यवस्था ..से हैं ,स्कूल  सेंटर बदलवाने तक को घूस देते हैं |.जो लोग ऐसा करते हैं उनके यहाँ भीड़ ही भीड़ ...|पर क्लास में न कोई पढ़ता हैं ...न पढ़ाता हैं |स्कुल नक़ल को बेस बना लिए हैं ...जहाँ कभी बेस पढाई हुआ करती थी ...
                          यू पी बोर्ड्स के निकलने वाले टोपर का कुछ खास नही होता ....पालीटेक्निक,IERT ,सबका इग्जाम देते हैं कहीं नही हुआ ..तो फिर इलाहाबाद की बड़ी कोचिंगो में एडमिशन लेकर माँ बाप पर अतिरिक्त बोझ बनते हैं ...बड़ी मेहनत से दो जून की रोटी जुटाने वाले गार्जियन बच्चे का परसेंट देखकर अपना पेट काटकर उसे खर्चा देते हैं ,पर जिसका यूनिवर्सिटी के इग्जाम में नही हुआ उसका IIT में भला कैसे हो सकता हैं ?साईड में कोचिंग फल फूल रहे हैं ....पांडे सर तो LED लगवा लिए हैं ६०० बच्चो को एक बैच में पढ़ाते हैं .....CP शर्मा ,सुजीत सर सबकी कोचिंगे हैं ......न जाने कित्ती कोचिंगे इलाहबाद में यु पी बोर्ड के बच्चे चला रहे हैं ....अच्छा इन कोचिंगो में सेलेक्सन जिनका दिखाया जाता हैं ...वे कभी न कभी यहाँ पढ़े भी रहते हैं भले ही वे सेलेक्सन के समय कोटा में रहे हों ,फिर इनकी एक पेज वाली लिस्ट में २००३ में सिलेक्टेड बच्चे से लेकर २०१६ तक के बच्चे रहते हैं ...जनमानस संख्या देखता हैं ...साल नही ....होप देखता हैं .......जाल में फस जाता हैं ...
इसका क्या हल हो सकता हैं ?
प्राइवेट स्कूल किस दिशा में बच्चो को धकेल रहे हैं?

19 April 2016

प्रथम त्रिमास



प्रथम माहिना-

          गर्भधारण के बाद आठ से नौ हफ्ते तक के बेबी को embryo कहते हैं |प्रथम माह के भ्रूणीय विकास में हृदय,फेफड़े और मस्तिष्क का विकास प्रारम्भ हो जाता हैं|गर्भ के लगभग 25वे दिन बाद हृदय धड़कने लगता हैं |भ्रूण एक थैली में बंद रहता हैं जिसमे वह जन्म होने तक रहता हैं |इस सैक (थैली)में भरा द्रव भ्रूण को बहरी आघातों से बचाता हैं |umbilical cord भ्रूण को माँ से जोड़ता हैं ,इसके जरिये भ्रूण को रक्त और पोषण की आपूर्ति होती हैं |इस अवस्था तक गर्भवती महिला को उसके स्तनों में कोमलता का एहसास होना शुरू हो जाता हैं कुछ मम्मियो को मार्निंग सिकनेस या उबकाई आनी शुरू हो जाती हैं |

दूसरा माह-

13 से 18 हफ्तों के बाद भ्रूण ,फीटस foetus बन जाता हैं, इसमें छोटे हांथो और अंगुलियों के साथ भुजाये विकसित हो जाती हैं पैरो से घुटने,टखने अंगूठो का प्रारम्भ होना शुरू हो जाता हैं |कुछ अंग जैसे पेट,लीवर मष्तिष्क ,रीढ़ और केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र भी विकसित होना प्रारम्भ हो जाते हैं ,पिट्स बच्चे की आँखों और कानो के रूप में विकसित हो जाते हैं|खड़े होने पर अब माँ बहुत जल्दी थक जाती हैं,उसे यूरिन के लिए जल्दी जल्दी जाना पड़ता हैं |थोडा उबकाई भी आती हैं ,इस वक्त पोषण का पर्याप्त ध्यान रखना जरुरी हैं | 

तृतीय माह-

इस माह के अंत में फीटस के लिंग के चिन्ह प्रकट होना शुरू हो जाते हैं ,चेहरे के स्पष्ट चिन्ह उभर आते हैं जैसे ठुड्डी,नाक और माथे का विकास,फीटस अब हाँथ पैर और सिर हिलाने लगता हैं |इस वक्त तक बच्चे की गति ,हलन-चलन माँ को पता नही चलता हैं ,हर बार डॉ के पास जाने पर पेशाब की जांच,रक्त चाप और वजन का रिकार्ड रखना आवश्यक होता हैं |

20 February 2016

गर्भावस्था की जाँचे -1

 

मित्रो ! अपना जीवन साथी कैसे चुने ?के लिखने के बाद अब प्रेग्नेंसी पर एक विस्तृत लेख माला प्रस्तुत करने जा रहा हूँ |अपने विचारो / प्रश्नों से अवगत कराते रहियेंगा|

 

मातृत्व की तैयारी -5

प्रथम त्रिमास के लिए टेस्ट-



  • लम्बाई/वजन

  • रक्तचाप

  • urine टेस्ट (:एल्बुमिन और शुगर की जांच के लिए )

  • ब्लड ग्रुप और Rh फैक्टर

  • ब्लड शुगर {Fasting and Post Parandial}

  • CBC(COMPLETE BLOOD COUNT)

  • Thyroid Function Test

  • Blood Test for HIV,HepatitisB,Rubella,VDRL(Venereal Disease Reserch Laboratory)

  • Ultrasound

  • HPCL की जांच थैलसीमिक स्क्रीनिंग के लिए

प्रथम त्रिमास के लिए विशिष्ट टेस्ट-

HcG

PAPP-A(Pregnancy Associated placental protien-A)

Maternal Serum Alpha Fetoprotien (MSAFP)

ULTRASOUND-

अल्ट्रासाउंड

NT(Nuchal translucency)और NB(Nasal Bone)

अल्ट्रासाउंड को जाते समय पेशाब रोक कर जाना चाहिए ,गायनेकोलाजिस्ट पेट पर gel लगाते हैं ,और कई बार माउस जैसे यंत्र को पेट पर घुमाते हैं ,जिससे फीटस का स्कैन चित्र मोनिटर पर आता हैं ,फीटस के फोटो ग्राफ को भविष्य के लिए सुरक्षित कर लिया जाता हैं |
 Rh Blood Group-
यदि स्त्री Rh निगेटिव तथा उसका पति Rh पोजिटिव हैं तो बच्चे के भी Rh पोजिटिव होने की सम्भावना हैं ,बच्चे के जन्म के समय ,बच्चे का ब्लड माँ के ब्लड सर्कुलेशन में मिलता हैं तो माँ के शरीर में एन्टीबाडी बनने लगती हैं ,अगला बच्चा यदि Rh पोजिटिव हैं तो उसमे पीलिया और एनीमिया होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं ,इस समस्या को दूर करने के लिए गर्भ के 28 वें हफ्ते एवं बच्चे के जन्म के 72 घंटे के भीतर Rh निगेटिव माँ को Anti-D immunoglobin का इंजेक्शन दिया जाता हैं |,प्रत्येक डिलीवरी ,अबार्शन या मिसकैरिज के बाद माँ को Anti-D immunoglobin का इंजेक्शन दिया जाता हैं |